गाजीपुर जनपद (उण्प्रण्) में औद्योगिक विकास नियोजन

 

अजीत कुमार यादव

प्राचार्यए गुरूकुल महाविद्यालय पत्थलगाँव जिला-जषपुर (छ00)

 

साराँश

प्रस्तुत शोध प्रपत्र गाजीपुर जनपद में औद्योगिक विकास नियोजन से संबन्धित है। अध्ययन क्षेत्र मध्य गंगा मैदान के उपजाऊ जलोढ़ मैदान मंे स्थित है, जिससे यहां सघन जनसंख्या पायी जाती है। क्षेत्र औद्योगिक दृष्टिकोण से पिछड़ा हुआ भू-भाग है। क्षेत्र में कृषि की प्रधानता के कारण कृषि संबन्धित उद्योग धन्धों का विस्तार पाया जाता है। क्षेत्र में औद्योगिक विकास के चरों का वितरण असमान रूप मे पाया जाता है। फलस्वरूप नगरीय प्रधान क्षेत्रों में औद्योगिक क्रियाकलापों की अधिकता के कारण इन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का स्तर उच्च कोटि का एवं ग्रामीण क्षेत्रांे मे जहां परिवहन व अन्य अवस्थापनात्मक तत्वों का अभाव है वहां औद्योगिक विकास का स्तर निम्न कोटि का है। यदि क्षेत्र मे औद्योगिक विकास नियोजन के अन्तर्गत कुटीर एवं लघु उद्योगांे के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों का विकास किया जाये तो यहां के निवासियांे को रोजगार के अवसर उपलब्ध होगंे, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा एवं प्रति व्यक्ति आय मंे वृद्धि से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में उत्तरोत्तर वृद्धि हो सकेगी।

 

प्रस्तावना

आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है, जो किसी राष्ट्र की परम्परागत अर्थव्यवस्था में व्याप्त अवरोधों को दूर करके उसे आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति की नई दिशायें प्रदान करता है (टेलर, 1969)। वर्तमान में औद्योगिक विकास ऐसे विकास का पर्याय बन चुका है, जो आधुनिकता एवं वैज्ञानिक तकनीक से ओत-प्रोत है, जिसमें पिछड़े हुये समाज को उपर उठाने की असीम क्षमतायें विद्यमान हंै, जो राष्ट्र भौतिक साधनों से सपन्न होते हुये विपन्न हंै, वे औद्योगिक विकास के द्वारा अपने विपुल साधनों का कुशलतम उपयोग करके राष्ट्रीय उत्पादन तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि कर सकते हैं। इस प्रकार वे अपने नागरिकों की निर्धनता को दूर करके उन्हे उच्च जीवन-स्तर प्रदान करते हैं (यादव 2008)। आधुनिक युग में औद्योगिक विकास एक धर्म बन चुका है। आज औद्योगीकरण की दौड़ में विश्व के सभी राष्ट्र सम्मिलित हैं। इस दौड़ में कुछ राष्ट्र आगे बढ़ गये हंै, जिन्हें विकसित राष्ट्र कहा जा सकता है। अन्य राष्ट्र आगे बढ़ने के लिए प्रयत्नशील हैं। विकसित राष्ट्रों में भी परस्पर औद्योगिकरण के अधिकाधिक ऊंचे स्तर पर पहुंचने के लिए होड़ लगी हुई है। इसी प्रकार क्षेत्रीय स्तर पर सभी क्षेत्र औद्योगिक विकास करके निवासियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में निरंतर संघर्ष कर रहें हैं (पाण्डेय 1985)। किसी क्षेत्र के औद्योगिक विकास में कुशल श्रमिक ही उत्पादन प्रक्रिया में वृद्धि कर सकता है तथा उद्योगों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान देता है, (टर्नर एवं गोलब,1997)

 

अध्ययन क्षेत्र

गाजीपुर जनपद उत्तर प्रदेश एवं वाराणसी मण्डल के पूर्वी भाग में 25019’ से 25054’ उत्तरी अक्षांश एवं 8304’ से 83058’ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। यह जनपद पूर्व में बिहार राज्य के बक्सर जनपद से, पश्चिम में जौनपुर, दक्षिण में चन्दौली, दक्षिण-पश्चिम में वाराणसी, उत्तर-पश्चिम में आजमगढ,़ उत्तर में मऊ एवं उत्तर-पूर्व में बलिया जनपद से घिरा हुआ है।

 

जनपद का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 3,377 वर्ग किमी. है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 1.5 प्रतिशत है। इस जनपद की पूर्व-पश्चिम की ओर लम्बाई 89 किमी. एवं उत्तर-दक्षिण की ओर चैड़ाई 59 किमी. है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से गाजीपुर जनपद 5 तहसीलों, 16 विकासखण्डों, 193 न्यायपंचायतों, 1050 ग्रामपंचायतों, 3364 ग्रामों (2665 आबाद ग्राम एवं 699 गैर आबाद ग्राम) में विभक्त है। 2011 की जनगणना के अनुसार जनपद की कुल जनसंख्या 36,22,727 है, जिसमें 18,56,584 पुरूष एवं 17,66,143 महिलायें हैं। यहां का औसत जनघनत्व 1072 व्यक्ति/वर्ग किमी, साक्षरता 74.27ः एवं लिंगानुपात 951 है।

 

विधितंत्र

प्रस्तुत शोध प्रपत्र में औद्योगिक विकास स्तर ज्ञात करने हेतु चरों के निर्धारण में प्राथमिक एवं द्वितीयक ओकड़ों का उपयोग किया गया है। औद्योगिक विकास स्तर हेतु चयनित चरों का सांख्यिकीय विधि के अंर्तगर्त  ैबवतम विधि का उपयोग करके विकासखण्डों को निम्न श्रेणियों में विभक्त करके विश्लेषण किया गया है।

 

औद्योगिक विकास के चर

औद्योगिक विकास से आशय किसी क्षेत्र के सर्वांगीण आर्थिक विकास से है। औद्योगिक विकास से ही किसी क्षेत्र में निवास कर रही जनता के जीवन स्तर की दशायें, प्रतिव्यक्ति आय, रहन-सहन आदि का विश्लेषण किया जा सकता है, (पाण्डेय एवं शर्मा, 2004)। क्षेत्र में औद्योगिक विकास स्तर ज्ञात करने के लिए विकास खण्ड के अनुसार औद्योगिक विकास के चरों का चयन किया गया है, जिनके माध्यम से क्षेत्र में औद्योगिक विकास की दशाएं ज्ञात की गयी है, जो इस प्रकार हंै।

 

पंजीकृत कारखानों की संख्या- किसी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में औद्योगिक कारखानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसमें व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। क्षेत्र में पंजीकृत कारखानों की कुल संख्या 519 है। गाजीपुर विकासखण्ड में 77, जखनियां में 49, जमानियां में 46, सैदपुर में 39 एवं रेवतीपुर विकासखण्ड में पंजीकृत कारखानों की संख्या 5 है।

 

कार्यरत श्रमिक

उद्योगों की अवस्थिति का महत्वपूर्ण तथ्य इसमें कार्य करने वाले श्रमिकों का होता है। श्रमिक उद्योग की आत्मा होते हंै। क्षेत्र में पंजीकृत कारखानों में कुल कार्यरत श्रमिकों की संख्या 1807 है। गाजीपुर विकासखण्ड में 230, कासिमाबाद में 198, जरवनियां में 183 एवं रेवतीपुर विकासखण्ड में कारखानों में 15 कार्यरत श्रमिक हंै।

 

लघु औद्योगिक इकाई एवं कार्यरत श्रमिक

क्षेत्र में कुल लघु औद्योगिक इकाईयों की संख्या 14989 है। जखनियां विकासखण्ड में 1713, जमानियंा में 1,571, सादात में 1,354 एवं रेवतीपुर विकासखण्ड में लघु औद्योगिक इकाई की संख्या 57 है। क्षेत्र के लघु औधोगिक इकाईयों में कुल कार्यरत श्रमिकों की संख्या 25,536 है। कासिमाबाद विकासखण्ड में 3,023, जखनियंा में 2,867, सादात में 2,305, सैदपुर में 1,828 एवं रेवतीपुर विकासखण्ड में श्रमिक 142 कार्यरत हैं।

खादी ग्रामोद्योग एवं कार्यरत श्रमिक

 

क्षेत्र खादी ग्रामोंद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर कुल खादी ग्रामोंद्योग की संख्या 1,679 है। जमानियां विकासखण्ड में 525, मुहम्मदाबाद में 327, गाजीपुर में 176, मरहद में 126, विरनों में 125 एवं करण्डा विकासखण्ड में 1 खादीग्रामों उद्योग हंै। क्षेत्र के कुल खादी ग्रामोद्योग में कुल कार्यरत श्रमिकों की संख्या 13865 है। जमानियंा विकासखण्ड में 3,362, मुहम्मदाबाद में 2,577, विरनों में 2,456 एवं करण्डा विकासखण्ड में 8 श्रमिक खादी ग्रामोद्योग में कार्यरत हैं।

 

पारिवारिक उद्योग- क्षेत्र के पारिवारिक उद्योग में कुल कार्यशील जनसंख्या का मात्र 5.4ः भाग ही संलग्न है। वाराचवर एवं कासिमाबाद विकासखण्ड 6.5ः-6.5, सैदपुर में 6.30, मुहम्मदाबाद में 6, करण्डा में 6, विरनों में 5.9, जखनियंा में 5.9ः एवं जमानियां विकासखण्ड में 4.1ः जनसंख्या पारिवारिक उद्योग में संलग्न हैं।

 

स्पष्ट है कि अध्ययन क्षेत्र में औद्योगिक विकास को प्रभावित करने वाले चरों के माध्यम से औद्योगिक विकास स्तर ज्ञात किया गया है। सामाजिक विकास स्तर ज्ञात करने के लिए विकासखण्डानुसार चरों के मूल्यों का औसत एवं प्रमाणिक विचलन ज्ञात करके सूत्र द्वारा प्रत्येक चर र्का  ैबवतम ज्ञात किया गया है।

र्   ैबवतम त्र ग्.ग्-

      ग् त्र विकास खण्ड अनुसार चरों का मूल्य

      ग्-त्र चरों का औसत मूल्य

 

औद्योगिक विकास स्तर ज्ञात करने के लिए का विकासखण्डानुसार प्राप्त सभी चरों के मूल्य को जोड़कर औद्योगिक विकास स्तर ज्ञात करने हेतु समन्वित मूल्य ज्ञात किया गया है, जिनका परास 0 से धनात्मक 6.59 एवं ऋणात्मक 0 से 8.71 है। इसे तालिका संख्या 1.1 एवं चित्र संख्या  1.1 के अनुसार विभिन्न विकास स्तरों में विभाजित किया गया है।

 

औद्योगिक विकास का क्षेत्रीय प्रतिरूप

औद्योगिक विकास का स्तर्र ण्ैबवतम विधि से ज्ञात कर उसका क्षेत्रीय वितरण प्रतिरूप निरूपित किया गया है। क्षेत्र में औद्योगिक विकास स्तर को 5 भागों में बंाटा गया है।

 

अति उच्च विकास स्तर- इसके  अन्तर्गत क्षेत्र के एक विकासखण्ड जमानियंा सम्मिलित है, जिसका विस्तार दक्षिणी उच्च भू-भाग गंगा खादर क्षेत्र में है। इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास की दशाएं एवं पारिवारिक उद्योग उच्च कोटि का पाया जाता है।

 

उच्च विकास स्तर

इसके अन्तर्गत क्षेत्र के 4 विकासखण्ड गाजीपुर, कासिमाबाद, जखनियंा, मुहम्मदाबाद आते है, जिनका विस्तार क्षेत्र के मध्यवर्ती निम्न भूभाग, उत्तरी एवं मध्यवर्ती क्षेत्रों में है। गाजीपुर अध्ययन क्षेत्र का जनपद मुख्यालय एवं प्रमुख नगर होने के कारण यहां अवस्थापनात्मक सुविधओं का विस्तार अधिक पाया जाता है, जिससे यहां औद्योगिक क्रियाकलापो की प्रधानता पायी जाती है, जबकि कासिमाबाद, जखनिया एवं मुहम्मदाबाद विकासखण्ड मे पारिवारिक उद्योग के साथ पंजीकृत कारखानो की अधिकता होने से यहां औद्योगिक विकास का स्तर उच्च श्रेणी का पाया जाता है।

 

मध्यम विकास स्तर-

इसके अन्तर्गत क्षेत्र के 4 विकासखण्ड विरनांे, सैदपुर, वाराचवर एवं सादात आते हैं। जिनका विस्तार क्षेत्र के उत्तरी भाग में एवं उत्तरी-पश्चिमी तथा उत्तरी-पूर्वी गंगा खादर क्षेत्र में है। इन क्षेत्रों में पंजीकृत कारखानें एवं लघु औद्योगिक इकाईयों के कारण औद्योगिक विकास मध्यम स्तर का है।

 

मध्यम न्यून विकास स्तर

इसके अन्तर्गत क्षेत्र के 4 विकासखण्ड भदौरा, देवकली, मरदह एवं मनिहारी विकास खण्ड आते है। जिनका विस्तार क्षेत्र के उत्तरी व दक्षिणी-पष्चिमी भाग एवं दक्षिणी-पूर्वी भाग में है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की दशाएं मध्यम न्यन स्तर की है।

 

न्यून विकास स्तर

इसके अन्तर्गत क्षेत्र के क्षेत्र के 3 विकासखण्ड करण्डा, भांवरकोल, रेवतीपुर सम्मिलित है, जिनका विस्तार क्षेत्र के दक्षिणी एवं दक्षिणी-पूर्वी गंगा खादर के निम्न भू-भाग में स्थित है। यहंा औद्योगिक विकास की दशाएं न्यून स्तर की पायी जाती हैं।

 

स्पष्ट है कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास का अति उच्च स्तर क्षेत्र के दक्षिणी भाग में पाया जाता है जहां पर खादी ग्राम उद्योग की अधिकता एवं नगरीय क्षेत्र होने के कारण अधिक है। क्षेत्र के मध्यवर्ती एवं उत्तरी भाग में औद्योगिक विकास का स्तर उच्च कोटि का हैं। जबकि क्षेत्र के उत्तरी-पूर्वी एवं उत्तरी पष्चिमी भाग में औद्योगिक विकास मध्यम है तथा दक्षिणी-पष्चिमी एवं दक्षिणी-पूर्वी व उत्तरी भाग में औद्योगिक विकास कम है, जबकि दक्षिणी एवं दक्षिणी पष्चिमी भाग में औद्योगिक विकास न्यून है।

 

औद्योगिक विकास नियोजन

औद्योगिक क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। त्वरित आर्थिक विकास औद्योगिक क्षेत्र के द्वारा संभव होता है। कृषि उद्योग अन्तर्सम्बंध बेरोजगारी को दूर करने में सहायक है। साथ ही उद्यागों के केन्द्रीकरण तथा विविधिकरण का शसक्त माध्यम है। समन्वित विकास में औद्योगिक नियेाजन आवश्यक है। क्षेत्र में औद्योगिक विकास स्तर की पहचान करना एवं उद्योगों से सम्बंधित समस्याएं एवं संभावनाओं का विवेचन उनकी आयोजना द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

 

किसी भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन औद्योगिक विकास से किया जाता है। विकसित अर्थव्यवस्था वाले राष्ट्र मूलतः औद्योगिक प्रधान ही है। औद्योगीकरण ही से राष्ट्रीय आय में वृद्धि से जीवन स्तर एवं रहन-सहन का स्तर ऊंचा उठता है। नये उद्योगों के प्रादुर्भाव से पूंजी का निर्माण होता है। तो नये नगरों का विकास होता है। तथा साख-बैंकिग सेवाओं का विकास होता है। यातायात के साधनों के के विस्तार से बड़े एवं मध्यम स्तर के उद्योगों का विकास होता है। इसलिये प्रादेशिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिये उद्योगांे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब कोई भी प्रदेश औद्योगीकरण की ओर अग्रसर होता है तो उनमें संरचनात्मक परिवर्तन होने लगते है, कृषि क्षेत्र से बेरोजगार श्रमिक उद्योगों की ओर उन्मुख होने लगते है जिससे तृतीयक व्यवसायों में भी रोजगार के अवसर बढ़ते है। अध्ययन क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। औद्योगिक विकास के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि यहां औद्योगिक विकास के माध्यम से जीवन स्तर में वृद्धि करने के लिये नियोजन की आवश्यकता है।

 

चट्ट उद्योग

क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। 0.05ः भू-भाग पर जूट एवं सनई का उत्पादन किया जाता है। क्षेत्र के सादात, देवकली एवं सैदपुर विकासखण्ड में जूट के बोरा बनाने का कार्य किया जाता है।

 

डेरी एवं खोवा उद्योग

क्षेत्र में दुग्ध का उत्पादन बढ़ाने के लिये उत्तम नस्ल की गायें एवं भैंस पालने के लिये प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, जिससे यहां खोवा उ़द्योग के विकास की संभावना है। सैदपुर, सादात एवं देवकली विकासखण्ड मंे दुग्ध का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। इसलिये इन क्षेत्रों में डेरी फार्म खोलने की योजना करके रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा सकते हंै।

 

कालीन उद्योग

अध्ययन क्षेत्र के मरदह विकासखण्ड में रूहीपुर, जरगो, पलिया, जखनिया में झोटारी, देवकली विकासखण्ड मंे भितरी, विशुनपुरा, सिकन्दरपुर मंे कालीन उद्योग विकसीत है। गाजीपुर जनपद केन्द्र पर कालीन विक्रय केन्द्र खोलकर आयात निर्यात की आवश्यकता है।

 

कताई मिल

यहां के कासिमाबाद विकासखण्ड के बहादुरगंज नगर में कताई मिल में कपड़े बुनने के लिये सूत तैया किया जाता है। यहां कपड़ा बुनने का कारखाना खोलकर यहां के निवासियों को रोजगार परक बनाने की आवश्यकता है।

 

पोटेशियम एवं सोडियम नाइट्रेट

क्षेत्र में क्षारीय एवं लवणीय मिट्टी अधिक पायी जाती है। इस मिट्टी से पोटेशियम एवं सोडियम नाइट्रेट बनाने का कार्य किया जाता है। रेह से कपड़ा धोने का साबुन एवं तम्बाकू बनाया जाता है। सादात एवं करण्डा विकासखण्ड में इस कार्य को विकसीत करने की योजना से निवासियों को रोजगार परक बनाने की आवश्यकता है।

 

रेशम कीट कुटीर उद्योग

क्षेत्र में रेशम पालन का कार्य किसानों द्वारा शहतूत के वृक्षों पर किया जाता है। यह उद्योग गाजीपुर करण्डा, देवकली, सैदपुर, मुहम्मदाबाद एवं भांवरकोल विकासखण्ड में फल-फूल रहा है। क्षेत्र के गाजीपुर सैदपुर, एवं मुहम्मदाबाद प्रमुख नगरीय केन्द्रों रेशम उद्योग विक्रय केन्द्र एवं कारखानों को विकसीत करने की योजना से रोजगार के अवसर में वृद्धि से निवासियों की जीवन प्रत्याशा, जीवन स्तर में वृद्धि से औद्योगिक विकास नियोजन को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही क्षेत्र के बड़े केन्द्रों राईस मिल, आटा चक्की, बीड़ी उद्योग, अगरबत्ती एवं मोमबत्ती उद्योग विकसीत करने की आवश्यकता है।

 

लघु उद्योग नियोजन

लघु उद्योग वह उद्योग इकाई है, जिसमें अधिक पूंजी एवं अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। इसकी स्थापना के लिये प्रर्याप्त मात्रा मंे भूमि एंव उच्च तकनीकी तथा अवस्थापनात्मक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका है। क्षेत्र में एक चीनी मील एवं शराब कारखाना है।

 

नन्दगंज सिहोरी सुगर मिल

यह सुगर मिल नन्दगंज बाजार से एक किमी. दूर उत्तर दिशा में स्थित है। वर्तमान समय यह मिल वित्तीय संकट के कारण बन्द है, जिससे यहां बड़े पैमाने पर उत्पादित गन्ना बेकार हो रहा है। इसके नियेाजन की आवश्यकता है। इस सुगर मिल को पुनः संचालित करने से सुगर निर्मित करके कृषकों को आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

 

गुलाब जल एवं इत्र उद्योग

गाजीपर जनपद पुराने समय से गुलाब जल एवं इत्र के लिये प्रसिद्ध है। गुलाब जल तांबे के बड़े-बडे़ बर्तनों मंे बनाये जाते है। इसमें 12 से 16 हजार तक फूल समा सकते है। प्रति 08 हजार फूलों से 12 से 13 किलो पानी निकालकर 10 किलोग्राम गुलाब जल तैयार किया जाता है। इसके सुनियोजित विकास हेतु गुलाब के फूलों की खेती का विस्तार करने की आवश्यकता है। 

  

रंग उद्योग

सैदपुर नगरीय क्षेत्र में रंग बनाने का कारखाना है। यहां बड़े पैमाने पर रंग उद्योग को विकसित करके निवासियों को रोजगार परक बनाने की आवश्यकता है। यहा से रंग अन्य राज्यों एवं नेपाल देश में निर्यात् किया जाता है। साथ ही सैदपुर में खादी भंडार केन्द्र है तथा सूत तैयार करके खादी के कपड़े बनाये जाते है जिसे और विकसीत करने की आवश्यकता है।

 

शराब कारखाना

क्षेत्र के नन्दगंज सुगर मिल के परिसर में यह शराब कारखाना स्थापित है। इसे बडे़ पैमाने पर विकसित करके निवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

 

अफीम कारखाना

यह कारखाना जनपद का सर्वप्रथम कारखाना है। यह कारखाना नगर के मध्य भाग में 45 एकड़ भूमि पर स्थित है। यहां बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जाती है। साथ ही इस उद्योग को और विकसित करने की आवश्यकता है।

 

इस्पात उद्योग नियोजन

इस कारखाने की स्थापना सादात विकासखण्ड के दक्षिण में कटयां गन्ना शोध के पास है। इस उद्योग के स्थापित होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होन से निवासियों के जीवन स्तर में सुधार होने की संभावना है। साथ ही यहां से सस्ते परिवहन लागत पर लोहे की सामाने उपलब्ध हो जायेगी। स्पष्ट है कि क्षेत्र मे औद्योगिक विकास नियोजन कार्यक्रम द्वारा प्रति व्यक्ति आय मे वृद्धि से उनके जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है।

 

REFERENCES:

1.       Taylor, L. (1969), “Development Patterns: A Simulation Study” The Quarterly Journal Economics, 83(2): 220-241.

2ण्  यादव, अजीत कुमार (2008)रू सेवा केन्द्र एवं समन्वित ग्रामीण विकासः जनपद गाजीपुर का एक प्रतीक अध्ययन, अप्रकाशित शोध प्रबंध दीनदयाल उपाध्यााय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर, पृष्ठ संख्या 89-93

2.       Pandey, J. N. (1985): A Strategy for Rural Development in V.K. Srivastav Commercial Ativities and Rural Development in South Asia P.P 441-444.

3.       Turner, A.G. and Golub, S.S. (1997), “Multilateral Unit Labor Cost Based Indicators of Competitivenes for Industrial, Developing and Transition Economies” IMF Staff Studies for the World Economic Outlook.

5ण्  पाण्डेय, रविन्द्र कुमार एवं शर्मा , वी. एन. (2004)रू  पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों का विकास स्तर, समस्याएं एवं नियोजन उ.भा.भू.प. अंक 33 (1) जून 2004 पृष्ठ संख्या 33-41

 

 

Received on 15.03.2013

Revised on 05.04.2013

Accepted on 09.04.2013     

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Research J. Humanities and Social Sciences. 4(2): April-June, 2013, 127-131